स्वाइन फ़्लू से जुड़ी मिथक और सच्चाई - Swine Flu Myths and Facts in Hindi

स्वाइन फ़्लू से जुड़ी मिथक और सच्चाई - Swine Flu Myths and Facts in Hindi

स्वाइन फ़्लू से जुड़ी मिथक और सच्चाई(Swine Flu Myths and Facts in Hindi): कोई भी बीमारी फैल जाती है तो तुरंत उस बीमारी के बारे मे मिथक भी फैल जाते है बीमारी की तरह| यही हाल है स्वाइन फ़्लू के बारे में| लोगो के दिमाग़ मे इससे जुड़ी कई ग़लत फैमी है और इस के कारण वो शायद ग़लत कदम भी उठाए या तो लापरवाही रखे| जानिए स्वाइन फ़्लू से जुड़ी हक़ीकत और मिथक और सही रास्ता अपनाए| 

स्वाइन फ़्लू से कोई ख़तरा नहीं है - Swine flu poses no real threat

  • मिथ्स एसोसिएटेड विथ स्वाइन फ़्लू (Myths associated with swine flu in hindi) कई है और उसमे से एक यह है की स्वाइन फ़्लू से कोई ख़तरा नहीं है जो ग़लत है क्योंकि इस के लक्षण गहरे हो जाए तो मरीज़ की मौत हो सकती है| 
  • सिम्पटम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू (Symptoms of swine flu in hindi) आम फ़्लू जैसे ही है मगर गंभीर लक्षण मे साँस लेने मे तकलीफ़, उल्टी होना और ब्लीडिंग होना है, जो सचमुच ख़तरनाक  है और तुरंत हॉस्पिटल मे ट्रीटमेंट के सम्बोधित है| 
  • हाउ लोंग इस फ़्लू कॅन्टेजॅस(How long is flu contagious in hindi) इस बात मे भी ख़तरा है क्योंकि संक्रमित होने के 4-5 दिनों मे लक्षण दिखाई देते है और इस दरमियाँ व्यक्ति दुसरो को संक्रमित कर सकता है| स्वाइन फ़्लू के दौरान 4-5 दिनों से हफ्ते 10 दिन तक चलता है जिस दौरान उसकी हालत गंभीर हो सकती है लापरवाही से और मिट जाने के 10 दिनों तक भी वो दूसरे को संक्रमित कर सकता है| 

H1N1 महामारी होनी ही है और रोक नहीं सकते है - H1N1 Outbreaks are inevitable and cannot be prevented

  • H1N1स्वाइन फ़्लू (H1N1 swine flu) महामारी तो होनी ही है यह एक ग़लत फैमी है| यह हवा से और संक्रमित चीज़ को छूने से फैलता है और लापरवाही से जाने अंजाने मे फैलता है| स्वाइन फ़्लू के कारणों (causes of swine flu) से बच के रहे तो H1N1 को रोक सकते है| 
  • सभी को जानना चाहिए की स्वाइन फ्लू के लक्षण क्या है ,स्वाइन फ्लू कैसे होता है और यह कैसे फैलता है और इससे बचाव कैसे होता है तो इस का प्रसारण नहीं होगा| 

प्राकृतिक तरीके से प्रतिकारक शक्ति टीके लगवाने से बेहतर है – Naturally acquired immunity is better than immunity through vaccination

  • यह ग़लत फैमी है की प्राकृतिक तरीके से स्वाइन फ़्लू के विरुद्ध प्रतिकारक शक्ति H1N1 स्वाइन फ़्लू के टीके से बेहतर है क्योंकि H1N1 वाइरस के टीके मे खास निष्क्रिया वाइरस होते है जो शरीर मे जा के एंटीबाडी पैदा करवाते है जिस से H1N1 के विरुद्ध रक्षण मिलता है| 
  • एक बार स्वाइन फ़्लू हो जाए तो दूसरी बार नहीं होगा यह आधा सच है क्योंकि प्रतिकारक शक्ति हमेशा के लिए नहीं रहती है और भविष्य मे सिम्पटम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू ज़रूर प्रकट होंगे संक्रमित होने पर| 

स्वाइन फ़्लू के टीके सलामत नहीं है क्योंकि यह प्रायोगिक है - The swine flu vaccine is not safe because it is experimental in hindi

  • यह सच है की H1N1 स्वाइन फ़्लू के टीके को बेहतर बनाने मे प्रयोग होते रहते है मगर यह मिथक है की यह सलामत नहीं है| टीके इंजेक्षन के ज़रिए दिए जाते है और इस प्रकार के टीके सलामत है क्योंकि उस मे रहे वाइरस मृत होते है जब की नाक से दिए जाने वाले स्प्रे मे यह थोड़े निष्क्रिया किए जाते है जो सभी के लिए उत्तम नहीं होते है| 
  • कई प्रकार के स्वाइन फ़्लू वैक्सीन मे उसका असर तेज करने के लिए रसायन मिलाए जाते है उन रसायन से अगर व्यक्ति एलर्जिक हो तो उस मे तकलीफ़ होती है मगर फ़्लू शॉट से ख़तरा नहीं है| 

मौसमी फ़्लू के टीके लगवाने से H1N1 से बचाव होता है –  If you get a seasonal flu shot you are protected against H1N1 in hindi

  • स्वाइन फ़्लू ट्रीटमेंट किसी दवाई से नहीं होता है इसीलिए टीके से रक्षण करना ठीक है| आजकल अमेरिका और विदेशो मे आम और मौसमी फ़्लू के टीके मे H1N1 के टीके भी शामिल होते है मगर इस पर पूरा भरोसा ना रखे और ख़ास H1N1 स्वाइन फ़्लू के टीके लगवाए पूरी तरह सुरक्षित रहने के लिए| आम मौसमी फ़्लू मे H1N1 के विरुद्ध लड़ने वाले तत्त्व ना भी शामिल हो| 
  • इस प्रकार का टीका जो सभी प्रकार के फ़्लू के सामने सुरक्षित रखे, मिलना भी शायद मुश्किल हो अपने देश में इसीलिए अलग से स्वाइन फ़्लू शॉट लगवाए| 

स्वाइन फ़्लू क्या बर्ड फ़्लू से ज़्यादा बुरा है? -  Is swine flu worse than bird flu in hindi?

  • बर्ड फ़्लू को एवियन फ़्लू कहते है और यह पक्षियो मे H5N1 वाइरस के कारण होता है और बहुत कम ख़तरा है की यह इंसानो को संक्रमित करे| 
  • स्वाइन फ़्लू सूअर मे पाए जाने वाले H1N1 वाइरस से होता है और यह वाइरस हवा से और संक्रमित चीज़ो को छूने से आसानी से मनुष्यो मे भी फैल जाता है जिससे यह महामारी का रूप ले सकता है इसीलिए यह स्वाइन फ़्लू बर्ड फ़्लू से ज़्यादा ख़तरनाक और बुरा है मनुष्यो के द्रष्टिकोण से| 
  • रुकिये, आजकल बर्ड फ़्लू का नया रूप H7N9 वाइरस पाया गया है और घातक साबित हो रहा है| फिर भी यह H5N1 और H7N9 वाइरस जल्दी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति मे फैलते नहीं है, सिर्फ़ संक्रमित पक्षियो के संपर्क मे आने से फैलता है| 
  • यह नया बर्ड फ़्लू का रूप, H7N9 के लक्षण मे निमोनिया और ग्रंथि को नुकसान होता है और ज़्यादा ख़तरनाक साबित हो रहा है| 
  • बर्ड फ़्लू शरीर के सभी भागो पर असर करता है और स्वाइन फ़्लू ज़्यादातर श्वसन तंत्र पर| तो एक द्रष्टिकोण से बर्ड फ़्लू ज़्यादा बुरा ज़रूर है स्वाइन फ़्लू  से| 

स्वाइन फ़्लू अन्य फ़्लू जैसा है और मरने वालो की संख्या आम फ़्लू से मरने वाले की संख्या से कम है  - Swine flu is just mild flu, the death rates are lower than for normal flu

  • सिम्पटम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू पहले तो श्वसन तंत्र मे नज़र आते है गर्भवती महिला, जवान और छोटे बच्चो के लिए ख़तरनाक है जबकी आम फ़्लू बुड्ढों  पर गहरा असर करता है जिस कारण स्वाइन फ़्लू को ज़्यादा गंभीरता से लेना चाहिए| 
  • स्वाइन फ़्लू अन्य फ़्लू की तरह तंदूरस्त लोगो मे हफ्ते मे शमन होता है मगर देखभाल की ज़रूरत है नहीं तो गहरे लक्षण प्रकट हो के गंभीर परिणाम हो सकते है| 
  • स्वाइन फ़्लू के सामने खड़े रहना, यह पित्रैक(genes) पर भी आधारित है इसीलिए इस का प्रभाव कई लोगो पर गहरा होता है और कई लोग, चाहे वो अस्वस्थ हो, उन पर स्वाइन फ़्लू का असर कम होता है| 
  • साधारण फ़्लू मे कई अलग प्रकार के फ़्लू शामिल है और अगर संख्या प्रकाशित हुई है तो यह सच्चे आँकड़े नहीं है स्वाइन फ़्लू के और आम फ़्लू मे इसलिए आंकड़ों पर भरोसा नहीं रखना चाहिए|

स्वाइन फ़्लू के लक्षण आम फ़्लू जैसे ही है और बुखार आए तो यह स्वाइन फ़्लू हो सकता है - The symptoms are like regular flu| You have got it if you have fever in hindi

  • यह ग़लत फैमी है और मिथ स्वाइन फ़्लू से जुड़ी है| 
  • आम फ़्लू और सिम्पटम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू मे बुखार ज़रूर आता है मगर H1N1 वाइरस से खाँसी होती है मगर बलगम बाहर नहीं आती है और शरीर मे तीव्र दर्द होता है| 
  • सिर्फ़ बुखार ही एक लक्षण नहीं जिस पर भरोसा रखे क्योंकि दोनो प्रकार के फ़्लू मे बुखार तो है मगर स्वाइन फ़्लू मे थकान ज़्यादा लगती है और खास बात तो यह है की छींक नहीं आती है जो आम फ़्लू मे अक्सर होती है| 
  • साइन्स ऑफ स्वाइन फ़्लू मे ख़ास तो यह है की सीने मे दबाव ज़्यादा महसूस होता है जब की आम फ़्लू मे यह कम है| 

स्वाइन फ़्लू सिर्फ़ कमजोर और बीमार शरीर पर असर करता है तंदुरस्त पर नहीं - You are safe as long as you are healthy, only sick weak people get really ill

  • यह बिल्कुल गलत फहमी है क्योंकि स्वाइन सभी को शिकार बना लेता है| 
  • एक तो H1N1 स्वाइन फ़्लू वाइरस की ख़ासियत यह है की यह छोटे बच्चो को, जवानो को और गर्भवती महिलाओ पर गहरा असर करता है| 
  • तंदूरस्ती से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि बूढ़े स्वस्थ ना होकर भी H1N1 का प्रकोप झेल लेते है जबकी तंदूरस्त जवान और बुड्ढे इसका शिकार हो गये है| 
  • इसके पीछे का कारण जेनेटिक्स (genetics) माना गया है की अपने जीन्स (genes) पर आधारित है शरीर की इम्युनिटी और जीन्स के कारण कई लोग सहन कर पाते है और कई लोगो मे गंभीर परिणाम होते है| 

क्या पौष्टिक आहार के सेवन करने से, विटामिन का सेवन करने से, मास्क पहनने से और हाथ धोते रहने से स्वाइन फ़्लू से मेरा कुछ नहीं बिगाड़ेगा- I’ll be OK if I just eat organic food, take vitamins, wear a mask, wash my hands a lot and drink plenty of fluids in hindi

  • यह भी एक ग़लत फहमी है| यह ज़रूर है की संक्रमित होने की शक्यता कम होगी और शरीर मे प्रतिकारक शक्ति बढ़ जाती है मगर स्वाइन फ़्लू वाइरस फेफड़ो पर पहले असर करता है और शरीर मे आँखो के मार्ग, मुँह मे से और नाक में से प्रवेश कर सकता है| 
  • प्रतिकारक शक्ति जीन्स पर भी आधारित है इसीलिए सावधानी लेने पर भी अगर शरीर के जीन्स ऐसे है की शरीर सक्षम नहीं है H1N1 के विरुद्ध लड़ने मे तो स्वाइन फ़्लू हो सकता है| 
  • यह वाइरस आँखो में से भी शरीर मे दाखिल हो सकता है| 
  • मास्क से पूरा रक्षण नहीं मिलता है क्योंकि छिद्रो मे से वाइरस आसानी से श्वसन तंत्र मे दाखिल हो सकते है| 

क्या अपने बचाव के लिए में फेस मास्क पहनू? – Should I wear a mask to protect against swine flu?

  • कौसेस(causes) ऑफ़ स्वाइन फ़्लू है की हवा मे फैले वाइरस या चीज़ो पर लगे वाइरस शरीर मे दाखिल हो जाए तो बीमारी लग जाती है इसीलिए ज़्यादातर लोग मानते है की मास्क पहने तो वो सुरक्षित है मगर यह ग़लत फैमी है| वाइरस का कद इतना छोटा होता है की यह मास्क के अंदर छिद्रो से आसानी से पसार हो सकते है| 
  • चेहरे पर मास्क लगाने से दूसरे के छींकने से या थूंकने पर जो हवा मे कन होते है वो शरीर मे दाखिल ना हो सके मगर हवा तो दाखिल होती है और इस मे वाइरस हो तो शरीर मे आ जाएँगे| 
  • अगर सिम्पटम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू दिखाई दे तो मरीज़ को ज़रूर फेस मास्क पहन लेना चाहिए ताकि उसके खांसने से, छींकने से और बोलने से हवा मे आसानी से H1N1 स्वाइन फ़्लू वाइरस ना फैल जाए| 
  • फेस मास्क से संपूर्ण रक्षण नहीं मिलता है क्योंकि वाइरस छिद्रो मे से जा सकते है इतने बारीक होते है और सास लेने से भी वो पसार हो सकते है| 
  • फेस मास्क पहेन तो ले सावधानी के तौर पर मगर मरीज़ से 10 फुट का अंतर बनाए रखे| 

क्या हाथ मिलाना सुरक्षित है? - Is it safe to shake hands in hindi? 

  • नहीं| अगर किसी से भी हाथ मिलाए तो उसके हाथो पर अगर स्वाइन फ़्लू वाइरस हो तो वो आप के हाथो पर लग जाएगा और इन्ही हाथो को चेहरे पर लगाए, नाक पर, मुँह पर और आँखो पर लगाए तो वाइरस शरीर के अंदर दाखिल हो सकता है| 
  • हाथ मिलाना है तो हाथो पर दस्ताने पहने के रखे और फिर घर आने पर दस्ताने निकाल के स्टेरिलीज़(sterilize) करे और हाथो को डिसइंफेक्टेंट  (disinfectant) से धो दे और इस बीच दस्ताने वाले हाथ से चेहरे को ना छुए| 

स्वाइन फ़्लू का संक्रमण कैसे होता है – How is swine flu transmitted in hindi?

  • स्वाइन फ़्लू कौसेस(causes)है स्वाइन फ़्लू H1N1 वाइरस जो हवा मे फैल जाते है और कोई संक्रमित व्यक्ति खाँसे, थूके या छींके तो किसी जगह पर लग जाते है और इन जगह को छूने के बाद इन्ही हाथो को चेहरे, नाक, मुँह और आँखो को छूने से वाइरस का प्रसार होता है| 
  • स्वाइन फ़्लू H1N1वाइरस इन मार्गो से श्वसन तंत्र मे फैल जाते है और इस का पहला हमला फेफड़ो  पर होता है| 

पोर्क (सूअर का मास) खाने से स्वाइन फ़्लू हो सकता है? Can you get the flu by eating pork in hindi?

  • सूअर का मास खाने से स्वाइन फ़्लू नहीं होता है और किसीने यह बताया है तो यह एक मिथक है| 
  • स्वाइन फ़्लू कॉज़स है H1N1 स्वाइन फ़्लू वाइरस जो हवा मे से या संक्रमित चीज़ो को छूने से, वाइरस को शरीर में से फेफड़ो के अंदर जाने तक सहायक होता और फिर इस वाइरस का शरीर के अंदर फैल जाना| सूअर का मास खाने से (जो आम तौर पर पक्का के खाया जाता है) इस मैं कोई ख़तरा नहीं है| 

क्या किसी को गालो पर या होंठो पर चुम्मा करना ठीक है? -  Is it OK to kiss someone on the cheek or lips?

  • नहीं, जो दिखने मे स्वस्थ है, उनके शरीर मे भी स्वाइन फ़्लू का वाइरस हो सकता है और चुम्मा करने पर यह वाइरस आप के शरीर मे दाखिल होने की संभावना है इसीलिए सावधानी के तौर पर किसी को चुम्मा ना करे| 
  • अगर 100% भरोसा है की वो व्यक्ति किसी भी तरह से संक्रमित नहीं है तो खुलके चुम्मा करे| 

क्या मुसाफ़िरी उचित है स्वाइन फ़्लू के माहौल में? Should people avoid travelling in hindi? 

  • स्वाइन फ़्लू कौसेस मे एक है की संक्रमित व्यक्ति के श्वसन से, छींकने से और खांसने से हवा मे वाइरस फैल जाता है जो बंद जगह मे दूसरे के श्वसन तंत्र के अंदर प्रवेश कर सकते है| इसीलिए यह आप के फायदे के लिए हिदायत दी जाती है की स्वाइन फ़्लू की महामारी चल रही हो तो मुसाफ़िरी ना करे क्योंकि बस मे, प्लेन मे और ट्रेन मे कौन जाने किस व्यक्ति को स्वाइन फ़्लू है| 
  • मुसाफिरी या कही आना जाना अनिवार्य है तो चेहरे को ढँक के रखे और हाथो पर दस्ताने पहन के रखे और हो सके वहाँ तक किसी चीज़ को ना छुए, ना ही दस्तानो से अपने आँख, नाक और मुँह को भी| 

स्वाइन फ़्लू बीमारी का कोई दवाई नहीं है - There is no cure for swine flu in hindi

  • यह बात सच है क्योंकि स्वाइन फ़्लू H1N1 वाइरस से होता है| स्वाइन फ़्लू मे दिए जाने वाले टैमीफ्लू  से वाइरस पर असर नहीं होता है मगर वाइरस के कारण स्वाइन फ्लू के लक्षण कम तकलीफ़ दायक हो जाते है| 
  • स्वाइन फ़्लू का प्रकोप अपने आप शरीर मे हफ्ते के अंदर कम हो जाता है क्योंकि शरीर खुद एंटीबाडी बना के वाइरस के विरुद्ध लड़ता है| 
  • दवाई तो नहीं है स्वाइन फ़्लू मिटाने के लिए मगर स्वाइन फ्लू से बचाव (swine flu treatment in hindi) घरेलू उपाय से हो सकता है जिससे इस के दुष्प्रभाव कम होंगे और रिकवरी जल्दी से आ जाती है| 

इंडिया मे स्वाइन फ़्लू वैक्सीन और दवाई की कमी है - India has shortage of drugs to treat swine flu

  • सिर्फ़ इंडिया ही नहीं बल्कि दूसरे देशो में भी जहाँ स्वाइन फ़्लू की महामारी चल रही है वहाँ पर स्वाइन फ़्लू वैक्सीन और दवाई की कमी है| 
  • यह सच है की कई जगह पर जहाँ स्वाइन फ़्लू का फैलाव ज़्यादा है वहाँ पर दवाई की कमी और वैक्सीन की कमी महसूस होती है इंडिया में| 
  • स्वास्थ अधिकारी का दावा है की कोई दवाई और वैक्सीन की कमी नहीं है मगर सिर्फ़ प्रिस्क्रिप्शन पर उपलब्ध किए जाएँगे| तीन कंपनी दवाई बना रही है और इंडिया मे 60000 लोगो के लिए पर्याप्त मात्रा मे दवाई हाज़िर है|   

जीवन मे स्वाइन फ़्लू सिर्फ़ एक बार होता है – You get swine flu only once in your life

  • यह मिथक है की एक बार स्वाइन फ़्लू हो जाए तो जीवन भर फिर से नहीं होगा| 
  • आने वाले समय मे कोई भी फिर से स्वाइन फ़्लू का शिकार हो सकता है| 
  • स्वाइन फ़्लू टीके लगवाए तो सिर्फ़ एक साल तक रक्षण मिलता है| 

क्या स्वाइन फ़्लू संक्रामक है? - Is swine flu contagious in hindi?

  • जी हा| स्वाइन फ़्लू हवा से और संक्रमित चीज़ या व्यक्ति को छूने से फैल सकता है|
  • संक्रमित व्यक्ति मे साइन्स ऑफ फ़्लू ना हो फिर भी वो स्वाइन फ़्लू वाइरस उसके शरीर मे हो तो भी फैल कर दूसरो को संक्रमित कर सकता है| सावधान रहे| 

स्वाइन फ़्लू का फैलाव कैसे होता है? - How is swine flu spread in hindi?

  • स्वाइन फ़्लू वाइरस के कई कारण होते है और यह वाइरस संक्रमित व्यक्ति के छींकने से, शवसन क्रिया से, खांसने पर और उसके थूक या नाक के पानी या बलगम के माध्यम से दुसरो को संक्रमित कर सकता है| 
  • किसी संक्रमित व्यक्ति के शरीर से वाइरस बाहर निकल के चीज़ो पर बैठ जाए और ऐसे चीज़ो को छूने पर और फिर यह वाइरस अपने शरीर मे मुँह ,नाक या आँखो के ज़रिए दाखिल होने पर इस बीमारी का फैलाव होता है| 

स्वाइन फ़्लू इतना ख़तरनाक नहीं है मगर फिर भी वॉट इस थी फ़्लू यह जानना ज़रूरी है और मित्स (Myths) एसोसिएटेड विथ स्वाइन फ़्लू भी जान लेना ज़रूरी है ताकि ग़लत फैमी ना रहे| स्वाइन फ़्लू मे बचाव ही उत्तम है| उपर बताए गई बाते ध्यान मे रखे और अपने आप को सुरक्षित रखे|

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11 Comments

कुणाल अरोड़ा, Oct 21, 2017

स्वाइन फ़्लू के बचाव और बीमारी की रोकथाम के उपाय:- खांसी अथवा छींक के समय अपने चेहरे को टिश्यू पेपर से ढककर रखें। टिश्यू पेपर को सही तरीके से फेंके अथवा नष्ट कर दें। अपने हाथों को किसी हैंड सैनीटाइजर द्वारा नियमित साफ करें।

रजनी सेठ, Oct 24, 2017

वातावरण में नमी बढ़ने के साथ स्वाइन फ्लू ज्यादा तेजी से फैलने लगता है। यही वजह है कि बारिश और सर्दी जैसे मौशमो में इसके रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी देखनो को मिलती हैं । इसलिए इन दिनों में यदि किसी को सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो H1N1 की जांच कराना चाहिए।

ऋषभ श्रीवास्तव, Oct 27, 2017

बुखार तेज ठंड लगना गला खराब हो जाना मांसपेशियों में दर्द होना तेज सिरदर्द होना खाँसी आना कमजोरी महसूस करना आदि लक्षण स्वाइन फ्लू में ही दिखाई पड़ते हैं।

बृजेश राय , Oct 30, 2017

स्वाइन फ्लू जैसे-जैसे शरीर में फैलता रहता है वैसे-वैसे रोगी की भूख कम हो जाती है और नाक से पानी बहने लगता है। कुछ लोगों को तो गले में जलन सूजन उबकाई उल्टियां या डायरिया भी हो जाता है जो कोई भी स्वाइन फ्लू वायरस से ग्रसित होता है उनमें इन लक्षणों में से तीन-चार लक्षण जरूर दिखाई पड़ते है।

ज्योत्सना , Nov 03, 2017

100 डिग्री फेरन्हाइट या उससे अधिक का टेंपरेचर हो तो इसकी वजह स्वाइन फ्लू हो सकता है. होता क्या है कि जब भी हमारे शरीर में कोई फॉरिन बॉडी एंटर करती है तो हमारा इम्यून सिस्टम उसे किल करने के लिए इम्यून सेल्स प्रोड्यूस करता है इस कारण से स्यटॉकिनेस और हिस्टमिन्स रिलीज़ होते हैं जो शरीर का तापमान बढ़ा देते हैं|

तरुण देव, Nov 06, 2017

स्वाइन फ्लू का इलाज नहीं है इलाज है अगर स्वाइन फ्लू के सिम्पटम्स आने के 48 घंटे के अन्दर अगर इसकी दवा खा ली जाए तो ये काफी हद तक नियंत्रित हो जाता है यदि गले में खराश के साथ-साथ खांसी और छींक आ रही है मतलब स्वाइन फ्लू हो गया है नहीं इसका सही पता टेस्ट से ही चलता है|

सुषमा नारंग, Dec 28, 2017

यदि गले में खराश के साथ-साथ खांसी और छींक आ रही है मतलब स्वाइन फ्लू हो गया है नहीं इसका सही पता टेस्ट से ही चलता है|

महिमा श्रीवास्तव , Jan 02, 2018

सांस फूलना: स्वाइन फ्लू वायरस से अफेक्टेड होने पर नोजल लाइनिंग्स में स्वेल्लिंग आ सकती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है अगर बुखार के साथ-साथ अचानक ही आपको सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है तो आपको फ़ौरन सतर्क हो जाना चाहिए|

निर्मल सिंग , Jan 05, 2018

जिनको ये बीमारी है वे इसके लक्षण दिखाई देने के एक दिन पहले से ही इसे स्प्रेड कर सकते हैं और बीमार पड़ने के 7 दिन बाद तक वे इसका फैलाव कर सकते हैं जबकि बच्चे 10 दिनों तक संक्रामक रह सकते हैं|

सीता गर्ग, Jan 10, 2018

स्वाइन फ्लू वायरस से अफेक्टेड होने पर नोजल लाइनिंग्स में स्वेल्लिंग आ सकती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है अगर बुखार के साथ-साथ अचानक ही आपको सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है तो आपको फ़ौरन सतर्क हो जाना चाहिए|

रूमिशा सेठी, Jan 22, 2018

स्वाइन फ्लू का इलाज नहीं है इलाज है इन फेक्ट अगर स्वाइन फ्लू के सिम्पटम्स आने के 48 घंटे के अन्दर अगर इसकी दवा खा ली जाए तो ये काफी हद तक नियंत्रित हो जाता है|

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