स्वाइन फ्लू (H1N1) के कारण, लक्षण, उपचार और बचने के उपाय

स्वाइन फ्लू (H1N1) के कारण, लक्षण, उपचार और बचने के उपाय

स्वाइन फ्लू (H1N1) के कारण, लक्षण, उपचार और बचने के उपाय (Swine flu causes, symtoms and homeremedies in hindi): आज कल स्वाइन फ़्लू का प्रकोप चल रहा है और लापरवाही के कारण कई लोग इस बीमारी से मारे गये है| स्वाइन फ़्लू के बारे मे जानना बहुत ज़रूरी है और सजग रहना ताकि स्वाइन फ़्लू के लक्षण नज़र आए तो फ़ौरन कदम उठा सके और गहरे परिणाम से बच सके| जानिए स्वाइन फ़्लू क्या है, स्वाइन फ़्लू इंडिकेशन्स कैसे होते है, मिथ्स एसोसिएटेड विथ स्वाइन फ़्लू और ट्रीटमेंट ऑफ स्वाइन फ़्लू ऐट होम| 

स्वाइन फ़्लू वाइरस क्या है – What is swine flu in hindi

  • स्वाइन फ़्लू एक प्रकार का RNA वाइरस है जिस का नाम है H1N1| 
  • यह खास कर के सूअर मे पाया जाता है और 1918 मे पहले यह पाया गया और इसके रूप मे परिवर्तन होने लगे|
  • 1990 मे नये प्रकार के स्वाइन फ़्लू वाइरस प्रकट होने लगे और मनुष्यो को संक्रमित करने लगे|
  • 2009 के बाद स्वाइन फ़्लू मनुष्यो मे बढ़ने लगा और WHO ने इसे माहमारी का दर्जा दिया| 

स्वाइन फ़्लू के कारण – Causes of swine flu disease in hindi

  • स्वाइन फ़्लू इंडिकेशन्स जानना है तो पहले स्वाइन फ़्लू के कारण जाने की यह H1N1 नामक वाइरस से होता है जो सूअर और पक्षियो मे पहले पाया जाता था मगर आज वो मनुष्यो को भी अपनी झपेट मे लिया है| 
  • स्वाइन फ़्लू तब होता है जब यह H1N1 वाइरस शरीर मे प्रवेश करता है, खास कर के श्वस तंत्र के द्वारा| 
  • H1N1 फैलाव का कारण है की यह वाइरस किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने से या छींकने से हवा मे फैलता है और दूसरे व्यक्ति के श्वसन तंत्र मे प्रवेश करते है और अन्य चीज़ो पर भी चिपक जाते है और किसी ने ऐसी चीज़ो को छू लिया और अपने चेहरे, नाक आदि को छुए तो यह वाइरस शरीर के अंदर फैल कर प्रसरते है और सिंप्टम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू फिर प्रकट होते है| 

2-4 साल के छोटे बच्चो मे स्वाइन फ़्लू के लक्षण - Symptoms of H1N1 in toddlers in hindi

  • लक्षण H1N1 इन टॉड्लर्स अन्य फ़्लू के जैसे ही होते है मगर इस के खास चिन्ह् है| 
  • स्वाइन फ़्लू टोडलेर्स मे हो जाए तो शरीर का तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट से उपर चला जाता है और नन्हे बच्चो मे 100.4 रहता है और थोड़े बड़े 2-5 साल के बीच के बच्चो मे 101.5 डिग्री फारेनहाइट रहता है| 
  • स्वाइन फ़्लू सिंप्टम्स इन बेबीस यह है की बच्चो के शरीर मे दर्द हो, सुस्ती हो और उर्जा नहीं रहती है यह स्वाइन फ़्लू सिंप्टम्स इन 5 ईयर ओल्ड को आप पहचाने| 
  • सिंप्टम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू इन किड्स इन हिन्दी मे नाक मे से पानी बहना, गले मे खराश, सर मे दर्द, ठंड लगना और खाँसी भी लक्षण है स्वाइन फ़्लू के| कई बार दस्त और उल्टी होने लगती है| साँस लेने मे तकलीफ़ हो तो गंभीर हालत समझ कर तुरंत डॉक्टर के पास चले जाए| 

व्यस्को मे स्वाइन फ़्लू के लक्षण - Symptoms of Swine Flu in adults

  • सिंप्टम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू इन एडल्ट्स बिल्कुल दूसरे फ़्लू जैसे होते है मगर तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट से उपर चला जाता है और ठंड लगती है
  • गले मे खराश और खाँसी होती है यह सिंप्टम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू है| 
  • नाक मे से पानी निकलना या कफ के कारण नाक बंद हो जाना|
  • स्वाइन फ़्लू इंडिकेशन्स मे शरीर मे दर्द और थकान रहती है| 
  • कभी कभी उल्टी और दस्त हो जाते है और चक्कर आते है जो गहरे लक्षण है ऐसे में तुरंत ट्रीटमेंट करना होता है ऐसे हालातो में| 

स्वाइन फ़्लू कितने देर तक रहता है - How long swine flu lasts in hindi

  • स्वस्थ इंसान को स्वाइन फ़्लू हो जाए और ट्रीटमेंट ऑफ स्वाइन फ़्लू घर पर करे तो प्राकृतिक तरीके से 3 दिन से लेके 7 दीनो मे इस का शमन होता है| 
  • जिन को यकृत, गुर्दे या दिल की तकलीफ़ हो तो उन को बहुत संभलना चाहिए क्योंकि इस के असर से और परेशानिया खड़ी हो जाती है और डॉक्टर से सलाह सूचन करे ताकि 10 दिनों के अंदर ठीक हो जाए| ऐसे हालात में स्वाइन फ़्लू प्रकट होने के 2 दीनो मे डॉक्टर उनकी जाँच कर के टैमीफ्लू जैसी दवाई देते है| 
  • स्वाइन फ़्लू का गहरा प्रभाव हो और हॉस्पिटल मे इलाज करना पड़े तो मरीज़ को ठीक होने मे 10 दिन लग जाते है और खाँसी-जुखाम करीब 15 दीनो तक रहता है| 

छोटे बच्चो मे स्वाइन फ़्लू के लक्षण - Symptoms of swine flu in kids in Hindi

  • स्वाइन फ़्लू सिंप्टम्स इन चाइल्ड अन्य फ़्लू के लक्षण जैसे होते है| 
  • गंभीर स्वाइन फ़्लू सिंप्टम्स इन बेबीस यह है की तापमान उँचा होने के साथ वो किसी भी खाने की चीज़ को हजम नहीं कर सकते है उल्टी और दस्त हो जाते है|
  • साँस लेने मे तकलीफ़ हो तो यह गहरा स्वाइन फ़्लू सिंप्टम्स इन चाइल्ड है| 
  • स्वाइन फ़्लू सिंप्टम्स इन 5 ईयर ओल्ड यह है की सुस्ती चढ़ जाती है, बुखार रहता है, भूख नहीं लगती है, शरीर मे दर्द रहता है और तापमान 101 डिग्री फारेनहाइट से उपर चला जाता है| 

स्वाइन फ़्लू से बचने के उपाय – Swine flu prevention in hindi

  • दूसरे संक्रमित व्यक्तियो से दूर रहे, भीड़-भाड़ मे ना जाए और अगर स्कूल जाता बच्चा है और स्कूल के अधिकारियो ने स्वाइन फ़्लू प्रेवेन्षन इन स्कूल के कदम ना उठाए हो तो अपने बच्चे को स्वाइन फ़्लू शॉट दिलाए और उसको अच्छी तरह सीखा के, हाथ मे दस्ताने और नाक के उपर मास्क पहनाए स्कूल भेजते वक़्त| 
  • अपने हाथ साबुन और डिसइंफेक्टेंट (disinfectant) से धोते रहे और अपने आँख, मुँह या नाक को हाथो से ना छुए| 
  • स्वाइन फ़्लू इंडिकेशन्स दिखाई दे तो स्कूल ना जाए या दफ़्तर या कॉलेज ना जाए ताकि और व्यक्ति संक्रमित ना हो जाए| 

स्वाइन फ़्लू का पहला लक्षण - First swine flu symptoms in hindi

  • स्वाइन फ़्लू वाइरस शरीर मे प्रवेश करके फैलने पर स्वाइन फ़्लू के पहले लक्षण प्रकट होते है करीब 7 दीनो के अंदर| 
  • जब स्वाइन फ़्लू वाइरस शरीर के अंदर दाखिल होता है तो इम्यून सिस्टम पर हमला करता है जिस से शरीर का तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट  के उपर चला जाता है| 
  • इसके साथ सर मे दर्द और शरीर मे दर्द और थकान महसूस होने लगती है यह है फर्स्ट स्वाइन फ़्लू सिंप्टम्स| 

स्वाइन फ़्लू दमा की बीमारी मे हालात और जटिल बनाए - Swine flu and asthma complications in hindi

  • दमे के मरीज़ मे सिंप्टम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू प्रकट हो तो सजग हो जाना चाहिए क्योंकि आगे जाके खाँसी तेज हो जाती है और खून भी बाहर आता है| 
  • साँस लेने मे बहुत तकलीफ़ हो जाती है अगर दमे के मरीज़ को स्वाइन फ़्लू हो जाए| 
  • दम घुटने लगता है| 

स्वाइन फ़्लू काढ़ा रेसिपी – Infusion for swine flu treatment at home/swine flu kadha

  • स्वाइन फ़्लू इंडिकेशन्स प्रकट हो तो जानिए हाउ टू क्योर स्वाइन फ़्लू ऐट होम काढ़े की मदद से| 
  • तुलसी, अदरक, पुदीना और कुचले नींबू को पानी मे डाल के उबाले, छान ले और काढ़े मे काली मिर्च और शहद मिला के सेवन करे| 
  • स्वाइन फ़्लू ट्रीटमेंट इन आयुर्वेद है गिलोय का सेवन, लहसुन की कली चबाना, अदरक का रस पीना, गरम दूध मे हल्दी मिला के पीना, आमला चूर्ण  और त्रिफला का उपयोग कर के काढ़ा बना के दिन मे 3-4 बार सेवन करना और प्राणायाम करते रहना| 
  • नेचुरल वेस टू ट्रीट स्वाइन फ़्लू ऐट होम है की ग्रीन टी मे अदरक का रस, नींबू का रस, काली मिर्च, दालचीनी और शहद मिला के इस काढ़े का सेवन करे| 

स्वाइन फ़्लू की आयुर्वेदिक दवा - Ayurvedic medicine for swine flu in hindi

  • स्वाइन फ़्लू ट्रीटमेंट इन आयुर्वेदा, जिस मे स्वाइन फ़्लू को कफ ज्वर कहा गया है, कई जड़ी बूटी के सहारे किया जाता है जैसे की त्रिभुवन कीर्ति रस| 
  • आयुर्वेद उपचार स्वाइन फ़्लू के लिए है संजीवनी वटी की गोली| 
  • स्वाइन फ़्लू इलाज आयुर्वेद द्वारा करना है तो भूमि आमला का सेवन करे और अग्निकुमार रस की गोली खाए| 
  • इस के अलावा पपीते के पत्तो को कुचल के रस निकाल के पीए या तो कच्चे पपीते को छिलके सहित कददू कस कर के खाए या रस निकाल के सेवन कर तो एंटीबाडीज का निर्माण तेज़ी से होगा और स्वाइन फ़्लू का शमन होगा| 
  • नींम के पत्ते को उबाल के चुटकी हल्दी और काली मिर्च डाल के स्वाइन फ़्लू काढ़ा पीते रहे| 

घर मे स्वाइन फ़्लू का इलाज - Swine flu treatment at home in hindi

  • तंदूरस्त इंसान को स्वाइन फ़्लू इंडिकेशन्स अनुभव होने लगे तो आराम करे, घर के बाहर ना जाए और हल्के भोजन के साथ काढ़ा बना के पिए जिस मे दालचीनी, सोंठ, लोंग, नींबू का रस, तुलसी का रस और शहद मिलाया हो| 
  • स्वाइन फ़्लू मे बुखार तेज आता है तो सब से पहले नेचुरल वेज़ टू ट्रीट स्वाइन फ़्लू ऐट होम है की ठंडे पानी का पटटी माथे पर, छाती पर और पैरो पर करते रहे| 
  • हो सके तो कपालभाती करे ताकि फेफड़ो मे से कफ बाहर आए और खून मे ऑक्सिजन का संचार हो| 

स्वाइन फ़्लू से बचने के घरेलू नुस्खे और देसी उपाय - Home remedies for swine flu in hindi

  • नेचुरल वेज़ टू ट्रीट स्वाइन फ़्लू ऐट होम है की गरम दूध मे हल्दी और काली मिर्च डाल के पीते रहे| 
  • नींम के पत्ते, पुदीना, तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च उबाल के काढ़ा बना के सेवन करते रहे| 
  • कपूर और इलाइची की पोटली सूंघते रहे और घर मे अलग अलग जगह पर यह पोटली बिछा के रखे| 
  • एलो वेरा के सेवन से स्वाइन फ़्लू के लक्षण मे राहत मिलती है| 
  • ग्रीन टी, जिसमे दालचीनी और लोंग डाला है उसके सेवन से जल्दी रिकवरी आती है| 
  • दालचीनी, यष्टिमधु और शहद का मिश्रण चाटे तो जल्दी से राहत पाएँगे| 

घर पर स्वाइन फ़्लू का इलाज - Swine flu treatment at home in hindi

  • सिंप्टम्स ऑफ स्वाइन फ़्लू शुरू हो जाए तो पहला लक्षण है बुखार जिस मे तापमान बढ़ जाता है तो तापमान कम करना बहुत ज़रूरी है जो ठंडे पानी के पटटी से किया जाता है| माथे पर, पैरो पर और छाती पर पानी के पटटी रखे ताकि शरीर का तापमान कम हो| 
  • कफ भर जाता है जिसे निकालने के लिए नस्य करे, जैसे की नाक मे युकलिप्टुस आयल और टी ट्री आयिल मिला के एक दो बूँद नाक मे डाले| 
  • तेज और तीखे पदार्थ जैसे की दालचीनी, काली मिर्च, लोंग, हरी मिर्च को प्याज और लहसुन के साथ मिला के सूप या काढ़ा बना के सेवन करते रहे| 
  • कड़वी चीज़ जैसे की नींम, करेला और करियातु का काढ़ा बना के पीते रहे| 
  • कच्चा पपीता खाए स्वाइन फ़्लू से जल्दी से छुटकारा पाने के लिए| 

स्वाइन फ़्लू के बारे मे मिथक और सच्चाइयां - Common myths about swine flu in hindi

  • जानिए मिथ्स एसोसिएटेड(myths associated) विथ स्वाइन फ़्लू याने की स्वाइन फ़्लू की ग़लत फैमिया| 
  • स्वाइन फ़्लू एक बार हो जाए तो दुबारा नहीं होता है यह ग़लत फैमी है
  • वाक्सिनेशन से भी आजीवान सुरक्षा मिलती है यह भी ग़लत फैमी है| 
  • फ़्लू शॉट से सिर्फ एक साल तक सुरक्षा मिलती है और स्वाइन फ़्लू फिर से हो सकता है| 
  • स्वाइन फ़्लू जान लेवा है यह तब होता है जब लापरवाही हो और इस के कारण दूसरे गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है तब| 
  • पोर्क याने सूअर का मांस खाने से स्वाइन फ़्लू होता है यह एक मिथक याने ग़लत फैमी है|
  • मास्क पहने तो संपूर्ण सुरक्षा मिलती है यह भी ग़लत है क्योंकि वाइरस इतने बारीक होते है की छिद्रो मे से आसानी से शरीर के शवसन तंत्र  मे दाखिल हो सकते है| 
  • स्वाइन फ़्लू घातक नहीं है यह भी ग़लत फैमी है तो बिल्कुल सजग रहे| 
स्वाइन फ़्लू से बचने के उपाय - Tips for swine flu prevention in hindi
  • स्वाइन फ़्लू प्रेवेन्षन इन स्कूल बहुत ज़रूरी है और स्कूल के अधिकारी यह खास ध्यान रखे की किसी भी संक्रमित स्टूडेंट को क्लासरूम मे दाखिल ना करे| 
  • स्वाइन फ़्लू से बचने के लिए हाथ डिसइंफेक्टेंट(disinfectant) से धोते रहे| कभी भी संक्रमित व्यक्ति की छुई हुई हो ऐसी चीज़ ना छुए ना तो उसके करीब जाए| 
  • भीड़ से दूर रहे| 
  • स्वाइन फ़्लू शॉट ले क्योंकि वैक्सीन से ही पूरा रक्षण मिलता है मगर फ़्लू शॉट साइड एफेक्ट्स भी होते है जैसे की गुइल्लैइन बार्रे सिंड्रोम(Guillain Barre syndrome)| 
  • विटामिन D फॉर स्वाइन फ्लू प्रेवेन्षन उपयोग करे और साथ मे विटामिन C युक्त आहार और फल सब्जी का उपयोग करते रहे| 

स्वाइन फ़्लू मे सावधानिया - Precautions against swine flu in hindi

  • जहाँ भीड़ हो वहाँ पर जाने का टाले जैसे बाज़ारो मे, हॉस्पिटल मे, बसों मे मुसाफ़री, थियेटर मे, आदि ताकि स्वाइन फ़्लू के वाइरस फैले वातावरण मे आप ना रहे| 
  • हाथ में दस्ताने पहने रखे और मुँह और नाक पर मास्क लगाए और बाहर जाए| 
  • पोष्टिक विटामिन D फॉर स्वाइन फ़्लू प्रेवेन्षन आहार लेते रहे और अन्य आहार जैसे की आमला, नींबू, अदरक का सेवन करे ताकि इम्यूनिटी बढ़े| 

गर्भवती पर स्वाइन फ्लू के लक्षण और असर - Effects of swine flu during pregnancy in hindi

  • H1N1 वाइल प्रेग्नेंट हो जाए तो यह गंभीर समस्या है और महिला को हॉस्पिटल मे दाखिल होना पड़ता है| 
  • स्वाइन फ़्लू का असर प्रेग्नेन्सी मे यह है की माता श्वास ना ले सके तो भ्रूण का विकास सही नहीं हो पाता है| 
  • H1N1 प्रेग्नेन्सी फर्स्ट ट्रिमस्टर (first trimester)का गहरा असर यह है की कॉम्प्लीकेशन्स (complications)जैसे की निमोनिया (pneumonia)हो सकता है और गर्भवती महिला की मौत हो सकती है इस समय के दौरान| 
  • गर्भवती महिला स्वाइन फ़्लू माहौल  से बच के रहे और हो सके तो स्वाइन फ़्लू वैक्सीन लगवा ले भले ही स्वाइन फ़्लू वैक्सीन इन प्रेग्नेन्सी साइड इफेक्ट्स हो मगर यह हल्के है जब की स्वाइन फ़्लू के असर गहरे है| स्वाइन फ़्लू का वाइरस खून से भ्रूण तक पहुँच सकता है और प्रिमेच्यूर डिलीवरी होने की संभावना है, एबॉर्शन हो सकता है, बच्चे की मौत हो सकती है और बच्चे मे कई ऐसे ख़ामिया हो सकती है| 

छोटे बच्चे मे स्वाइन फ्लू से बचने के लिए घरेलू नुस्खे - Swine flu treatment in child in hindi

  • स्वाइन फ़्लू सिम्प्टम इन चाइल्ड दिखाई दे तो डॉक्टर से ट्रीटमेंट करवाए और एंटीवायरस दवाई जैसे की टैमीफ्लू का डोस दे| 
  • बच्चे को आराम करने दे और सोने दे| 
  • बच्चे को पानी और दूध याने की लिक्विड्स अवश्य देते रहे ताकि डीहाइड्रेशन ना हो| 
यह है स्वाइन फ़्लू के कारण और सूचनाए जिसके उपयोग से आप स्वाइन फ़्लू ट्रीटमेंट घर पर कर सकेंगे और स्वाइन फ़्लू से बच के रह सकेंगे| स्वाइन फ़्लू को हल्के से ना ले क्योंकि यह जान लेवा हो सकता है|

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11 Comments

धार्मिंदर सैनी, Oct 21, 2017

स्वाइन फ़्लू एच१ एन१ के कारण साँस लेने की क्रिया में असाधारण तेजी बार बार उलटी होना चलने में अशक्त क्रिया की प्रतिक्रिया न देना घबराहट बार बार रोना बुखार और शर्दी-झुकाम का अनुभव होना पानी तथा प्रवाही पेय अरुचिकर लगना|

दिशा पटानी , Oct 25, 2017

एंटी वायरल औषधियों जैसे रेलेंज़ा और टामीफ्लू का प्रयोग करें रेलेंज़ा का प्रयोग करने के लिए एक डिस्क के आकार का औज़ार प्रयोग में लाएं। यह गर्भवती महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद है क्योंकि यह आसानी से आपके गले और फेफड़े तक पहुँचता है और इसका खून या प्लेसेंटा पर कोई असर नहीं होता।

सरला गौड़, Oct 27, 2017

आमतौर पर यह बीमारी एच1एन1 वायरस के सहारे फैलती है लेकिन सूअर में इस बीमारी के कुछ और वायरस (एच1एन2, एच3एन1, एच3 एन2) भी होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि सूअर में एक साथ इनमें से कई वायरस सक्रिय होते हैं जिससे उनके जीन में गुणात्मक परिवर्तन हो जाते हैं।

राहुल श्रिवास्तव, Oct 30, 2017

1.सांस लेने में तकलीफ, छाती में भारीपन महसूस होना। जी मिचलाना, उल्टी आना या ऐसा महसूस करना। 2.शरीर में दर्द के साथ बीच-बीच में बुखार चढ़ना-उतरना,कमजोरी महसूस होना,सिर दर्द की शिकायत होना। 3.अचानक सिर घूमने जैसी स्थिति महसूस करना या चक्कर आने की शिकायत करना। 4.ऐसे लक्षणों के आने का भ्रम होना भी स्वाइन फ्लू के ही लक्षण है।

मोना सिंग , Nov 03, 2017

स्वाइन फ्लू वायरस से अफेक्टेड होने पर नेज़ल लाइनिंग्स में स्वेल्लिंग आ सकती है. जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है अगर बुखार के साथ-साथ अचानक ही आपको सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है तो आपको फ़ौरन सतर्क हो जाना चाहिए|

ज्योत्सना , Nov 06, 2017

स्वाइन फ्लू वायरस से अफेक्टेड होने पर नसल लाइनिंग्स में स्वेल्लिंग आ सकती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है अगर बुखार के साथ-साथ अचानक ही आपको सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है तो आपको फ़ौरन सतर्क हो जाना चाहिए|

Parshant Kumar, Dec 28, 2017

अगर आप 5 साल से अधिक और 65 साल से कम हैं तो आपको स्वाइन फ्लू नहीं हो सकता ये किसी को भी हो सकता है पर 5 से कम और 65 से ज्यादा उम्र के लोगों को खतरा अधिक होता है

तृप्ति पोप्लि , Jan 02, 2018

स्वाइन फ्लू के उपचार में antibiotics काम नहीं करतीं क्योंकि यह बीमारी वायरस के कारण होती है बैक्टीरिया के नहीं हालांकि दर्द बुखार वगैरह के लिए आप ओवर-दा-काउंटर मेडिसिन्स ले सकते हैं|

मुहमद आलम, Jan 05, 2018

जैसे-जैसे ये बीमारी बढ़ती है मरीज को थकावट का अनुभव होने लगता है ऐसा हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्मयून सिस्टम) की वायरस से लड़ पाने की अक्षमता के कारण होता है ये सिम्पटम इन्फेक्टेड होने के 2-3 बाद देखा जा सकता है इस हालत में आराम करना चाहिए और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थ लेने चाहिए|

रतन सिंग , Jan 10, 2018

इंफ्लूएंजा वायरस आपकी नाक की लाइनिंग गले और फेफड़ों को भी प्रभावित करता है यह वायरस आपको संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आने पर प्रभावित कर सकता है यह वायरस आपके शरीर में आंखों नाक अथवा मुंह के जरिये प्रवेश कर सकता है यह बात याद रखिये सुअर का मांस खाने से स्‍वाइन फ्लू नहीं होता।

रोज़ा शेख, Jan 22, 2018

जैसे-जैसे ये बीमारी बढ़ती है मरीज को थकावट का अनुभव होने लगता है ऐसा हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली ( इम्मयून सिस्टम) की वायरस से लड़ पाने की अक्षमता के कारण होता है ये सिम्पटम इन्फेक्टेड होने के 2-3 दिन बाद देखा जा सकता है इस हालत में आराम करना चाहिए और इम्मयून सिस्टम को मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थ लेने चाहिए|